Thursday, June 2, 2011

zinda

tere saath se hi,
jalte hain bujhte hain raat din,
teri aawaz si hi,
jumbish hoti hai badan mein,
raat bhar khwab mein,
dekhta hu tujhko,
tab kahin zinda hota hu,
seher tak...

nishaan

bahut bechain,
ho jaata hu main,
jab mujhe,
apni raahon par,
tere kadmon k,
nishaan nahi milte.

Monday, September 29, 2008

iltaja

main tadapna chahta hu kuch der k liye,

isliye aisa karna,
meri saansein bottle mein bharke,
cork lagakar rakh dena,
ya
koi takiya jaagta mil jaaye,
mere bistar pe agar,
mere munh pe rakhkar,
meri saans lene ki aadat ko,
kuch der k liye tod dena,


sach mein agar mar gaya main,
tumhe takleef to bahut hogi,
khudkushi na kar lena.

Friday, September 5, 2008

ek dost

तुझसे मिला तो नहीं हूँ मैं,
न रू-ब-रू देखा है कभी,
एक धुंधली सी तस्वीर ज़रूर देखी है,
इन चश्मा चढी आँखों ने,
एक बड़ी सी कुर्सी पर,
पाँव लटकाए बैठी है तू,
ज़मीन से पाँव लगे न थे मगर,
तू ज़मीन पर ही थी,

मैंने जितनी बातें बतायी हैं उँगलियों से तुझे,
वो सब गौर से सूनी हैं तुने आँखें लगाकर,
और मुझे समझाया भी है कई बार,
तसव्वुफ़ का सहारा लेकर,
इसलिए,
तेरा हक है मुझपर,
उसी हक से तूने तोहफे में नज़्म मांगी थी,
ये नज़्म कुबूल कर लेना,

ये नज़्म तुझे बयान तो नहीं करती,
तेरे किरदार के लम्स ज़रूर शामिल हैं इसमें,
मैं शायद इतना ही जानता हूँ तुझे.

Sunday, August 10, 2008

Mohlat

तुम्हारे वक़्त से,
थोडी सी मोहलत मांगकर ,
जी लेता हूँ कुछ पल के लिए ,
सुना है की तुम ,
अपने रोज़गार में मसरूफ बहुत हो ,
मेरी याद भी नहीं आती अब तुम्हे ,
मेरा ख्याल भी नहीं आता होगा ,

हाँ ,फ़ोन करू तो कॉल बेक कर लेती हो ,
बस इतनी ही मोहलत मिलती है मुझे

Saturday, July 19, 2008

zindagi

ज़िन्दगी भी अजीब चीज़ है ,
मिन्नतें करके मिलती है ,
और जब मिल जाती है ,
तो खुद से भाग जाने का जी करता है ,
भागते रहो ,
बेमंजिल रास्तों पर ,
हाँफते रहो ,
कांपते रहो ,
कहीं इन रास्तों पर मंजिल न मिल जाए . .

khala

मेरे साथ साए चलते हैं ,
मेरे जाने पकड़कर ,
एक अँधेरी कैफियत को ,
मुझसे मिलाने की कोशिश में हैं ,
मुझे धकेलते रहते हैं ,
जानिबे तीरगी ,
मैं गिरता जाता हूँ ,
खला में ,अपनी मर्ज़ी से .